तेरी छाया होती जो मुझमें मैं विस्मित होता तेरी बाहों में, वो प्रीत मेरी तुम पाती उन अमर प्रेम की राहों में || तुम होते सपनों के सावन हो जेहन की जो भाषाओँ में, वो प्रेम की रचना पाती तुम उन संगीत की झंकारों में || तेरी झलक जो मिलती मुझको रेशम की गलियोंContinue reading “जो मिलती मुझको”
Author Archives: Ravendra Kumar
रश्मिरथी
वर्षों तक वन में घूम-घूम,बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,सह धूप-घाम, पानी-पत्थर,पांडव आये कुछ और निखर।सौभाग्य न सब दिन सोता है,देखें, आगे क्या होता है।मैत्री की राह बताने को,सबको सुमार्ग पर लाने को,दुर्योधन को समझाने को,भीषण विध्वंस बचाने को,भगवान् हस्तिनापुर आये,पांडव का संदेशा लाये।‘दो न्याय अगर तो आधा दो,पर, इसमें भी यदि बाधा हो,तो दे दो केवल पाँचContinue reading “रश्मिरथी”
मेरा गुरूर ऐसा है
कुछ अल्फ़ाज़ उनके ऐसे है किवक्त की समंदर भी न ढक पायेगें। तकीजे उनकी मुस्कुराहटों केउमर भर दरवाज़ा मेरा खटखटाएंगे,छिटककर खुलते नयन पट उनके,मेरी मुस्कान बन जायेंगे।। अम्बर! है तू अलबेला,तेरी शालीनता की सीमा नही,तेरे बदलते बादलों की सूरत भीकभी उसकी मूरत न बना पाएंगे।। गौर करके आना कभी आँगन में उनकेहैं! कितने खूबसूरत वो!!हमContinue reading “मेरा गुरूर ऐसा है”
तू प्रीत मेरी
मैं ताल तेरातू संगीत मेरीहर हार मेरीहर जीत तेरीहर हाथ मेराहर रंग तेराहर सपने तेरेऔर मेहनत मेरीहर अश्क़ तेराऔर हथेली मेरीहर खुशी तेरी और शोहरत तेरी,सावन के बारिश की हर बून्द हो तेरी।बस ऐसी हो प्रीत मेरी।। मैं राग तेरातू विलाप मेरीहर इकरार मेराहर इनकार तेराहर विछड़न मेरीहर आवेश तेराहर नासमझ तेरीहर बेचैनी मेरीहर तकरार तेरीऔर क्रंदन मेराहरContinue reading “तू प्रीत मेरी”
इकरार-ए-इश्क़
रात गुज़र गयी है तेरी यादो में , वो इश्क़-ए-मरहम न मिला है मुझको, दिल थाम कर बैठ जा साथी, अब इश्क़-ए-बारिश करनी है मुझको। रूह मेरी अब कम्पित होती, कुछ हरकत करनी है मुझको, तू क़बूल-ए-चमन होगा मेरा, अब इज़हारे-ए-गगन करना है मुझको। एक रहबर हो तेरे जैसा, खिली धूप संग रहना है मुझको।Continue reading “इकरार-ए-इश्क़”
मेरे जीने की जद्दोजहद
क्यो रूठी तमन्ना है मेरी मुझसे?कच्ची उमर में बैठा हूँ ऐसे।माई ने भेजा मुझेपैसे कमाने कोसपना मेरा था कभीछोटू संग स्कूल जाने को।देखता हूं लिखा हुआ तो,अभी भी लगता है किपड़ सकता हूँ जैसेसहसा याद आती हैमालिक की,तब लगता है कि,कुछ नही कर सकता हु ऐसे।अखबारों पर चाकू चलाने कादिल नही करतापर क्या करूँ ?चाकू न चलाऊContinue reading “मेरे जीने की जद्दोजहद”
बस आदि हूँ ऐसे सपनो का
रात्रि के अँधेरे मेंअपनों के बनाये खंडरो के बीच लेता हूँऔर रोज ही तो लेटता हूँ |फिर क्यों? आज हीये सोच रहा हूँसोच रहा हूँ की,ये गिरती हुयी दीवारे कुछ कह रही है मुझसेबता रही है शायद की,मेरी नकमियो ने उनको बदसूरत बना दिया हैउनकी गिरती ईंट, मेरा मनोबल तोड़ रही हैतेज़ हवाओ में उनकी उड़तीContinue reading “बस आदि हूँ ऐसे सपनो का”
"हसीन सा सपना मेरा "
आ तुझे दुल्हन बना दूँ, मैं अपने आँगन की। कली से कुसुम बना दूँ, मैं अपने उपवन की। प्रभात की मैं वो बूंद बना दूँ, ओस हुई है जो दूबा की। महक उठे जो वो सुगंध बना दूँ, शीतल हवा चली है संध्या की। जो मंडराए वो भंवर बना दूँ, मेहमान हुई है कलियों की।Continue reading “"हसीन सा सपना मेरा "”
"तू चाँद है, जो मेरा है नही
देख चाँद तू घूँघट में रहा कर, वरना मेरा घर रोशन होता है । क्यों नही समझता तू ,आदत हो गयी है मुझको तेरी,नही रह पाता हूं मैं,जब सुबह तू है चला जाता। माना कर न यार , दिल है मेरा भी, वरना बहुत रोता है। क्यों नही तू रुकता कभी,देख तू आए तो सपनेContinue reading “"तू चाँद है, जो मेरा है नही”
"अहसासों की पोटली "
ये इश्क़ मुकम्मल है हमकोउस रंग उड़ाती दुल्हन परभर गयी नित नई उमंग,उसकी मृगनयनी पलकों पर।क्या खूब कहा है उसने हमसेहम चल बैठे है उसकी गलियां,सुन कर उसकी ये हस्त कलाएंहम जा बैठे व्योम शिखर पर |है हस्तो पर कल्पित तूलिकाआवेग कुशुम सा आकर बैठा ,है उसके जो अठखेले सपनेदिए छाप हमने अंजन दृग पर |मन स्मृत है आभाContinue reading “"अहसासों की पोटली "”