भारतीयता

नमस्कार प्रिय भाईयो एवम् बहनो,

आज इस शुभ अवसर पर आप सभी लोगो को भारतीय गणराज्य के स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई। मैंने नीचे दी गयी पंकियो के माध्यम से भारतीयता शब्द को रेखांकित करने का प्रयास किया है। आप सभी से आपके विचार भी जानना चाहूँगा।

वादाखिलाफी

कंहा हर लम्हा था हमारा ! हिमालय की बुलंदियों पर, और आज वक्त एक ही रंजिश ने, समंदर में तबादला कर दिया। वादा था “उस” हमसफ़र का, हर मोड़ पर मिलने का ! पर उनकी हर साजिश ने, उनका हमसे ही फासला बड़ा दिया। _ravendra

आशा और निराशा

Poem, tries to capture all the hopes and expectations when someone goes into a true relationship (stanza I), and how he feels once he is forced to distant himself from his love. Separations matter for him (stanza II). At the same, he do not want to go into the sadness which can destroy himself. So he is trying to convince him that it is okay!. It is just a part of life. (stanza III)

स्वछन्द लेखकों के लिए

यंहा हर शख्स मसरूफ है अपने ही इल्म पर किसी ने लिखी है  इश्क़-ए-दास्ताँ अपनी किसी ने गैरो की हवेली में ही अज़ान दे दी देख हरकत, इन खुदगर्ज, दौलत परस्तों से गरीबों को एक लब्ज़ भी नसीब न हो सका || कोई तो सोचो उस मासूम के लिए है बदरंग जो बैठा सूखी डालContinue reading “स्वछन्द लेखकों के लिए”

नदी

गिरी शैल से कल कल कंकड़ पत्थर से चलकर लहर लहर लहराती पग पग में बलखाती घूम घूम कर चली आती पवन नीर है साथ लाती हे पवन दायनी, हे जीवन दायनी तुम जीव जगत में गंगा कहलाती || मेघ जलाशयपुत्र है छिपे जीवन विचित्र है हो, आश्रय इन जीवो का कृपा दृस्टि बनाये रखनाContinue reading “नदी”

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