" एक्सीडेंट की दिनचर्या "

आज सुबह हाइवे पर सड़क लहूलुहान थीगाड़ियों की तेज रफ़्तार मेंएक हल्की सी चीख थीसुनना बहुत मुश्किल थातेज ठण्ड में कोहरा भी बहुत थाऐसा नही है कोई सुन नही पा रहा थापर वास्तम में खुदगर्ज जिंदगी सेइंसानियत सर्मसार थीलोग बढ़ते जा रहे थेकुछ नज़र भी फेर रहे थेउनमे एक महासय सायद शेल्फी भी ले रहेContinue reading “" एक्सीडेंट की दिनचर्या "”

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