वह मुट्ठी की रेत सी फिसलती गयी हाथ से ,यहाँ, हर मंजर मेरा जर्रा-जर्रा टूटता चला गया |वो किसी काँच सा जिस्म को तोड़ती गयी,और मैं टूटी सीपियों सा उसे जोड़ता चला गया || आग की झुलस थी उसकी हर बात में,और मैं नैनो के नीर से उन्हें बुझाता चला गया |इश्क़ कहाँ, बस दूरियांContinue reading “उड़ती तस्वीरें”
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भगवान शिव और हम
This is a poem which tells a fictional story about how a group of children interacted with lord Shiva during their first visit to the Himalayan mountain. It is considered as the lord Shiva’s home.
A reason for conscious smile.
The invention in general and advancements in machines were never welcomed by masses. Each step was taken in direction of automation (mechanical advancement) declines the noble idea of production by masses. But all mechanizations were adopted and various arguments were put forth for their adoption, e.g. – political and economic unrest because of mechanization areContinue reading “A reason for conscious smile.”
The Journey Begins
Thanks for joining me! Good company in a journey makes the way seem shorter. — Izaak Walton
जो मिलती मुझको
तेरी छाया होती जो मुझमें मैं विस्मित होता तेरी बाहों में, वो प्रीत मेरी तुम पाती उन अमर प्रेम की राहों में || तुम होते सपनों के सावन हो जेहन की जो भाषाओँ में, वो प्रेम की रचना पाती तुम उन संगीत की झंकारों में || तेरी झलक जो मिलती मुझको रेशम की गलियोंContinue reading “जो मिलती मुझको”
रश्मिरथी
वर्षों तक वन में घूम-घूम,बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,सह धूप-घाम, पानी-पत्थर,पांडव आये कुछ और निखर।सौभाग्य न सब दिन सोता है,देखें, आगे क्या होता है।मैत्री की राह बताने को,सबको सुमार्ग पर लाने को,दुर्योधन को समझाने को,भीषण विध्वंस बचाने को,भगवान् हस्तिनापुर आये,पांडव का संदेशा लाये।‘दो न्याय अगर तो आधा दो,पर, इसमें भी यदि बाधा हो,तो दे दो केवल पाँचContinue reading “रश्मिरथी”
मेरा गुरूर ऐसा है
कुछ अल्फ़ाज़ उनके ऐसे है किवक्त की समंदर भी न ढक पायेगें। तकीजे उनकी मुस्कुराहटों केउमर भर दरवाज़ा मेरा खटखटाएंगे,छिटककर खुलते नयन पट उनके,मेरी मुस्कान बन जायेंगे।। अम्बर! है तू अलबेला,तेरी शालीनता की सीमा नही,तेरे बदलते बादलों की सूरत भीकभी उसकी मूरत न बना पाएंगे।। गौर करके आना कभी आँगन में उनकेहैं! कितने खूबसूरत वो!!हमContinue reading “मेरा गुरूर ऐसा है”
तू प्रीत मेरी
मैं ताल तेरातू संगीत मेरीहर हार मेरीहर जीत तेरीहर हाथ मेराहर रंग तेराहर सपने तेरेऔर मेहनत मेरीहर अश्क़ तेराऔर हथेली मेरीहर खुशी तेरी और शोहरत तेरी,सावन के बारिश की हर बून्द हो तेरी।बस ऐसी हो प्रीत मेरी।। मैं राग तेरातू विलाप मेरीहर इकरार मेराहर इनकार तेराहर विछड़न मेरीहर आवेश तेराहर नासमझ तेरीहर बेचैनी मेरीहर तकरार तेरीऔर क्रंदन मेराहरContinue reading “तू प्रीत मेरी”
इकरार-ए-इश्क़
रात गुज़र गयी है तेरी यादो में , वो इश्क़-ए-मरहम न मिला है मुझको, दिल थाम कर बैठ जा साथी, अब इश्क़-ए-बारिश करनी है मुझको। रूह मेरी अब कम्पित होती, कुछ हरकत करनी है मुझको, तू क़बूल-ए-चमन होगा मेरा, अब इज़हारे-ए-गगन करना है मुझको। एक रहबर हो तेरे जैसा, खिली धूप संग रहना है मुझको।Continue reading “इकरार-ए-इश्क़”
मेरे जीने की जद्दोजहद
क्यो रूठी तमन्ना है मेरी मुझसे?कच्ची उमर में बैठा हूँ ऐसे।माई ने भेजा मुझेपैसे कमाने कोसपना मेरा था कभीछोटू संग स्कूल जाने को।देखता हूं लिखा हुआ तो,अभी भी लगता है किपड़ सकता हूँ जैसेसहसा याद आती हैमालिक की,तब लगता है कि,कुछ नही कर सकता हु ऐसे।अखबारों पर चाकू चलाने कादिल नही करतापर क्या करूँ ?चाकू न चलाऊContinue reading “मेरे जीने की जद्दोजहद”