प्राज्ञ शुभारंग शुरू हुआ,
हिन्द पताका फहराएगी |
हर व्यक्ति होगा अखिल दक्ष ,
अब पुष्पित शुबह हो जाएगी |
अबकी इस होली में
तरणि-तनुजा जल लाएगी |
रंग भरा हुआ होगा जो ,
पिचकारी वो फैलाएगी |
अबकी ज्वार तेज होगा ,
कपट पताका हिल जाएगी |
देख कपटी भी विचलित होगा ,
जब नौका हिचकोले खायेगी |
अबकी बार जब सूरज होगा
शिथल धुप ढल जाएगी |
उस नई सवेरी किरण में ,
अब भारती खिलखिलाएगी |
कंठित होगा नया राग ,
हर खग नित संगीत बनाएगी |
विपुलव हुआ मैदानों में,
खुशियाँ हिमालय जाएंगी |
रमणी होगी हर स्त्री,
पौरुष रूप दिखाएगी |
विदुषी होगी जेहन से,
अम्बर पर छा जाएँगी |
नही सोयेगा जब भूखा कोई
प्रकृति भी मुस्कायेगी |
उम्मीदों की मीनारें होंगी,
सफलता चोटियां बनाएगी |
छद्म,पाखण्डो और हथकंडो से,
ये वसुंधरा मुक्त हो जाएगी |
जब हुई है लड़ाई दनुज से,
तो निश्चय ही विजय आएगी |
———- रावेन्द्र कुमार
हिन्द पताका फहराएगी |
हर व्यक्ति होगा अखिल दक्ष ,
अब पुष्पित शुबह हो जाएगी |
अबकी इस होली में
तरणि-तनुजा जल लाएगी |
रंग भरा हुआ होगा जो ,
पिचकारी वो फैलाएगी |
अबकी ज्वार तेज होगा ,
कपट पताका हिल जाएगी |
देख कपटी भी विचलित होगा ,
जब नौका हिचकोले खायेगी |
अबकी बार जब सूरज होगा
शिथल धुप ढल जाएगी |
उस नई सवेरी किरण में ,
अब भारती खिलखिलाएगी |
कंठित होगा नया राग ,
हर खग नित संगीत बनाएगी |
विपुलव हुआ मैदानों में,
खुशियाँ हिमालय जाएंगी |
रमणी होगी हर स्त्री,
पौरुष रूप दिखाएगी |
विदुषी होगी जेहन से,
अम्बर पर छा जाएँगी |
नही सोयेगा जब भूखा कोई
प्रकृति भी मुस्कायेगी |
उम्मीदों की मीनारें होंगी,
सफलता चोटियां बनाएगी |
छद्म,पाखण्डो और हथकंडो से,
ये वसुंधरा मुक्त हो जाएगी |
जब हुई है लड़ाई दनुज से,
तो निश्चय ही विजय आएगी |
———- रावेन्द्र कुमार