"शिद्दत है तुझे पाने की"

तेरी मोहब्बत में खोया हूं आज,
दिल कहता है, हद से गुजर जाऊ | 
देदे मुझे अपने दिल मे जगह,
फिर मैं नए आसियाने का आगुन्तक बन जाऊ ||

तेरी चंचल हंशी का जवाब नही है,
तो क्यूँ न तेरे होठो की पहचान बन जाऊ ?
तेरी खूबसूरती का कोई विकल्प नही है,
तो क्यूँ न मैं इसका हक़दार बन जाऊ !

है तू ताल इस जंहा की,
तो क्यों न मैं तेरा राग बन जाऊ | 
देदे मुझे अपनी पलकों में जगह,
तो मैं तेरे नयन का काजल बन जाऊ ||

तू चाँद है इस धरा की,
तो क्यूँ न मैं तेरा प्रकाश बन जाऊ?
देदे मुझे अपनी रास्तो में जगह,
तो मैं तेरा हमराही बन जाऊ !!

तू तरंग है जलधि की,
तो क्यूँ न मैं तेरा साहिल बन जाऊ 
देदे मुझे अपनी दिशाए 
तो मैं आकर तुझसे मिल जाऊ ||
                                     
                                –— रावेन्द्र कुमार 
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