रिक्त पद है जो मेरे,कभी भर लो तुम।आकर आंगन में मेरे,थोड़ा ठहर लो तुम।। तप के तपन से तपित,हो गये हो यदि तुम?भूल वस जो सिरह गया,वो बलवान पुरुष हो तुम।। नींद काल मे अनिंद्रित मेरे,आओ एक झपकी लो तुम।शुष्क काल मे रक्त मेरे,आओ शीतल जल लो तुम।। विरह, त्याग के वीर मेरे,नव उत्साह मेराContinue reading “कृषक”
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मन की विवेचना
वो आये और बैठे समीप हमारे,काली रात में चमकते हुए सितारे,आज हम उनसे पूछेगें,नही आज हम उनसे कहेंगे कि,कितनी बार ही हम सोचेगे,कितनी बार ही हम बोलेगे,कितनी बार ही तुम सुनोगे,औऱ कितनी बार ही तुम समझोगे,फिर भी तो हम झगड़ेगे,कितनी बार ही तो हम चीखेंगे।तो क्या इसका मतलब क्या है?की अब हम, हम नही होगें?याContinue reading “मन की विवेचना”
पलटते पन्ने
वो कहती थी कि मैं अपना इतिहास किसी को बताया न करूं,उसका कहना था कि भरी महफ़िल में लोग इसका मजाक उड़ाते हैं।अब क्या ही कहता उस नदान को नासमझो की अंजुमन में?लब्ज यही काफी है मेरे की, सही से देख लोग इसी से घबराते हैं।। हां वो बात अलग है कि उस मजाक सेContinue reading “पलटते पन्ने”
भगवान शिव और हम
This is a poem which tells a fictional story about how a group of children interacted with lord Shiva during their first visit to the Himalayan mountain. It is considered as the lord Shiva’s home.
" एक्सीडेंट की दिनचर्या "
आज सुबह हाइवे पर सड़क लहूलुहान थीगाड़ियों की तेज रफ़्तार मेंएक हल्की सी चीख थीसुनना बहुत मुश्किल थातेज ठण्ड में कोहरा भी बहुत थाऐसा नही है कोई सुन नही पा रहा थापर वास्तम में खुदगर्ज जिंदगी सेइंसानियत सर्मसार थीलोग बढ़ते जा रहे थेकुछ नज़र भी फेर रहे थेउनमे एक महासय सायद शेल्फी भी ले रहेContinue reading “" एक्सीडेंट की दिनचर्या "”