एक राह सुहानी होगी,वो खुश पल मंजर होगा।जब उड़ोगे तुम नभ पर,नीचे विशाल समुंदर होगा।। विरलय जग में ऐसा होगापथिक मन व्यथित जब होगा।वरना मजाल, जो दृढ मनोबल पर,अल्प आलस भारी होगा ।। तू बस उड़ा चल, निरंतर,यह संसार तेरा होगा।विघ्न जो असमय आया तुम पर,अंततः वही सर्व सुखदायीं होगा।। ~रावेन्द्र
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शक्ति और क्षमा
क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबलसबका लिया सहारापर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसेकहो, कहाँ, कब हारा? क्षमाशील हो रिपु-समक्षतुम हुये विनत जितना हीदुष्ट कौरवों ने तुमकोकायर समझा उतना ही। अत्याचार सहन करने काकुफल यही होता हैपौरुष का आतंक मनुजकोमल होकर खोता है। क्षमा शोभती उस भुजंग कोजिसके पास गरल होउसको क्या जो दंतहीनविषरहित, विनीत, सरल हो। तीनContinue reading “शक्ति और क्षमा”
कृषक
रिक्त पद है जो मेरे,कभी भर लो तुम।आकर आंगन में मेरे,थोड़ा ठहर लो तुम।। तप के तपन से तपित,हो गये हो यदि तुम?भूल वस जो सिरह गया,वो बलवान पुरुष हो तुम।। नींद काल मे अनिंद्रित मेरे,आओ एक झपकी लो तुम।शुष्क काल मे रक्त मेरे,आओ शीतल जल लो तुम।। विरह, त्याग के वीर मेरे,नव उत्साह मेराContinue reading “कृषक”
मन की विवेचना
वो आये और बैठे समीप हमारे,काली रात में चमकते हुए सितारे,आज हम उनसे पूछेगें,नही आज हम उनसे कहेंगे कि,कितनी बार ही हम सोचेगे,कितनी बार ही हम बोलेगे,कितनी बार ही तुम सुनोगे,औऱ कितनी बार ही तुम समझोगे,फिर भी तो हम झगड़ेगे,कितनी बार ही तो हम चीखेंगे।तो क्या इसका मतलब क्या है?की अब हम, हम नही होगें?याContinue reading “मन की विवेचना”
भगवान शिव और हम
This is a poem which tells a fictional story about how a group of children interacted with lord Shiva during their first visit to the Himalayan mountain. It is considered as the lord Shiva’s home.